नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में हुई गिरफ्तारी के खिलाफ दाखिल याचिका को सोमवार, 2 नवंबर को उनके वकील निजाम पाशा ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष रखा और जल्द सुनवाई की मांग की।
शुरुआत में पीठ ने कहा कि आजम खान को इस मामले में पहले हाई कोर्ट जाना चाहिए। हालांकि, वकील के अनुरोध के बाद मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि याचिका को इसी सप्ताह सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जा सकता है। अब सबकी नजर इस पर है कि सुनवाई कब होती है और अदालत क्या रुख अपनाती है।
जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़ा है मामला
आजम खान की गिरफ्तारी रामपुर की मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग प्रकरण में हुई है। ईडी का आरोप है कि यूनिवर्सिटी के निर्माण में सरकारी धन और सामग्री का उपयोग किया गया, जबकि यह राशि सरकारी कार्यों के लिए दी गई थी।
जांच एजेंसी का कहना है कि उत्तर प्रदेश के नगर विकास मंत्री रहते हुए आजम खान ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल किया और सरकारी धन यूनिवर्सिटी निर्माण में लगाया गया। ईडी निर्माण पर खर्च हुए लगभग 430 करोड़ रुपये के स्रोत की जांच कर रही है।
1170 करोड़ की संपत्ति कुर्क
ईडी ने 28 अक्टूबर को जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन और इमारतों को कुर्क किया था। एजेंसी के अनुसार इन संपत्तियों का बाजार मूल्य करीब 1170 करोड़ रुपये है। इससे पहले अगस्त में भी ईडी ने इस मामले में छापेमारी कर आजम खान से पूछताछ की थी। वहीं जुलाई में रामपुर विकास प्राधिकरण ने यूनिवर्सिटी परिसर की 38 इमारतों को गिराने का आदेश दिया था, जिसे यूनिवर्सिटी की ओर से चुनौती दी गई है।
14 दिन की न्यायिक हिरासत में
आजम खान को रविवार को गाजियाबाद की विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। वे फिलहाल ईडी से जुड़े इस मामले में जेल में हैं। सूत्रों के मुताबिक, ईडी उनसे आगे पूछताछ करना चाहती है और दिवाली के बाद कस्टडी रिमांड के लिए अदालत में अर्जी दे सकती है। अनुमति मिलने पर उन्हें लखनऊ स्थित ईडी के जोनल कार्यालय ले जाकर पूछताछ की जा सकती है।